देहरादून : ओलंपस हाई द्वारा ‘मंथन – युवा मनों से संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी, लेखक, अभिनेता एवं प्रेरक वक्ता कर्नल भास्कर भारती (सेवानिवृत्त) की पुस्तक ‘मंथन – रिफ्लेक्शंस ऑफ इंडियाज़ कॉन्शियंस’ का विमोचन किया गया।
इस कार्यक्रम में साहित्य, नेतृत्व और जीवन के अनुभवों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई। विद्यार्थियों को एक ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्व से रूबरू होने का अवसर मिला, जिनकी जीवन यात्रा साहस, रचनात्मकता और निरंतर स्वयं को नए रूप में विकसित करने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम में ओलंपस हाई के प्रबंध निदेशक डॉ. कुनाल शमशेर मल्ला भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), पुणे और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून के पूर्व छात्र कर्नल भास्कर भारती ने भारतीय सेना में 33 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। उनके सैन्य करियर में सियाचिन ग्लेशियर, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, पंजाब और राजस्थान जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनाती के साथ-साथ कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रवर्तन मिशन में योगदान भी शामिल रहा। उन्हें दो बार आर्मी कमांडर का प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। सैन्य सेवा के अतिरिक्त उन्होंने लेखन, अभिनय, फोटोग्राफी और फिल्म निर्माण जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाई है।
कार्यक्रम का शुभारंभ कर्नल भास्कर भारती के परिचय के साथ हुआ, जिसके बाद उनकी पुस्तक ‘मंथन – रिफ्लेक्शंस ऑफ इंडियाज़ कॉन्शियंस’ का औपचारिक विमोचन किया गया। अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में विचार साझा करते हुए उन्होंने उन अनुभवों और चिंतन के पहलुओं पर प्रकाश डाला, जिन्होंने उनकी पुस्तक को आकार दिया। पुस्तक के एक अंश के पाठ ने विद्यार्थियों को इसकी विषयवस्तु और विचारों से परिचित कराया। इसके पश्चात जीवन, व्यक्तिगत निर्णयों, महत्वाकांक्षाओं और आत्मखोज जैसे विषयों पर विचारोत्तेजक संवाद हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कर्नल भास्कर भारती और विद्यार्थियों के बीच संवाद सत्र रहा। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए। एक सम्मानित सैन्य अधिकारी से रचनात्मक क्षेत्रों में सक्रिय व्यक्तित्व बनने तक का उनका सफर विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा। उन्होंने अपनी यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया कि व्यक्तिगत विकास की कोई उम्र नहीं होती और नई रुचियों को अपनाने के लिए जिज्ञासा, दृढ़ संकल्प तथा बदलाव को स्वीकार करने का साहस आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या अर्चना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव, ज्ञान और साहित्यिक विचार साझा करने के लिए कर्नल भास्कर भारती के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद पुस्तक पर हस्ताक्षर सत्र और व्यक्तिगत संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को लेखक से सीधे बातचीत करने और उनके विचारों को करीब से जानने का अवसर मिला।
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