चारधाम यात्रा की समीक्षा बैठक में दिए जरूरी निर्देश
देहरादून। गृह मंत्रालय ने चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए राज्य सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया है। अपर सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार श्री अनुज शर्मा आपदा प्रबंधन के साथ ही अन्य तैयारियों की जानकारी लेते हुए सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए।
समीक्षा के दौरान उन्होंने होल्डिंग एरिया की व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा निर्देश दिए गए कि किसी भी आपदा अथवा आकस्मिक स्थिति में यदि यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़े, तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यात्रियों को स्वास्थ्य सेवाओं, ट्रैफिक मैनेजमेंट एवं सुरक्षा से संबंधित जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाए।
हेली सेवाओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस करते हुए गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए कि घाटी क्षेत्रों में उड़ान भरने का पर्याप्त अनुभव रखने वाले पायलटों को ही संचालन में लगाया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पायलट स्थानीय भौगोलिक एवं मौसमीय परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हों। एसओपी का सख्ती से पालन, निर्धारित समय पर उड़ान संचालन, एटीसी की पूर्ण सक्रियता तथा मौसम की सतत निगरानी के आधार पर ही हेली सेवाएं संचालित की जाएं।
क्राउड मैनेजमेंट के संबंध में विस्तृत चर्चा करते हुए एसडीआरएफ में मैनपावर बढ़ाने तथा चारधाम यात्रा के दौरान होमगार्ड्स की संख्या में वृद्धि करने के सुझाव दिए गए। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यात्रियों की प्रभावी स्क्रीनिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि गृह मंत्रालय उत्तराखण्ड के साथ पूर्ण रूप से खड़ा है तथा यात्रा के सफल संचालन हेतु हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी धामों की कैरिंग कैपेसिटी का समुचित ध्यान रखा जाए तथा माइक्रो लेवल पर विस्तृत रिस्क असेसमेंट किया जाए। संवेदनशील एवं जोखिमयुक्त स्थानों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान कर वहां के लिए विशेष एवं ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही यात्रियों तक समयबद्ध एवं प्रभावी एलर्ट पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे स्वयं भी आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठा सकें।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन तथा एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी द्वारा यूएसडीएमए की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि ट्रैफिक प्रबंधन हेतु तीन-स्तरीय एडाप्टिव ट्रैफिक सिस्टम लागू किया गया है, पार्किंग एवं होल्डिंग एरिया विकसित किए गए हैं, सीसीटीवी एवं एएनपीआर कैमरों के माध्यम से सतत निगरानी तथा रियल-टाइम ट्रैफिक एवं मौसम सूचना की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने बताया कि 12500 वाहन क्षमता वाले 127 पार्किंग स्थल, 12000 वाहन क्षमता वाले 47 हाॅल्टिंग एरिया, 21 स्थानों पर 36 एएनपीआर कैमरा, यात्रा रूट में 1290 सीसीटीवी कैमरे, 27 पीटीजेड कैमरा लगाए गए हैं। यात्रियों की स्वास्थ्य जांच हेतु 57 स्क्रीनिंग कियोस्क तथा ट्रेक मार्ग पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट स्थापित किए गए हैं। आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए यात्रा मार्ग पर 177 एम्बुलेंस की तैनाती की गई है, जिससे गंभीर परिस्थितियों में तत्काल रेस्पॉन्स सुनिश्चित किया जा सके।
यात्रा मार्ग पर एटीएस, बीडीएस एवं क्यूआरटी की तैनाती की गई है, जो किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सतत सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त ड्रोन निगरानी एवं व्यापक सीसीटीवी सर्विलांस के माध्यम से संवेदनशील स्थलों पर 24×7 नजर रखी जा रही है तथा सार्वजनिक ड्रोन उपयोग को भी नियंत्रित किया गया है, जिससे समग्र सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस अवसर पर जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि मौजूद रहे।
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