देहरादून : तुलाज़ इंटरनेशनल स्कूल में टेडएक्स तुलाज़ इंटरनेशनल स्कूल यूथ 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम ‘एआई & यूथ: रीडिफाइनिंग स्ट्रेंथ’ रही, जिसके अंतर्गत छात्रों, विशिष्ट अतिथियों और प्रेरणादायक वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मानवीय मूल्यों के सामंजस्यपूर्ण विकास पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत तुलाज़ ग्रुप के वाइस चेयरमैन रौनक जैन के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने नवाचार को अपनाने के साथ-साथ मूल्यों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर कुल सात वक्ता एवं 22 आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं को तुलाज़ ग्रुप के वाइस चेयरमैन रौनक जैन एवं नेट पप्पीज़ के सीईओ प्रतीक मारवाह द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में द दून स्कूल के हेडमास्टर जगप्रीत सिंह, सेतु आयोग के डोमेन लीड लव भारद्वाज, द हिमाचल टाइम्स की निदेशक इंद्रानी पांधी, कसिगा स्कूल की वाइस प्रिंसिपल अरुंधति शुक्ला, वाइस प्रेसिडेंट – टेक्नोलॉजी डॉ. राघव गर्ग, तथा तुलाज़ इंटरनेशनल स्कूल के हेडमास्टर रमन कौशल शामिल रहे।
वक्ताओं में से सेतु आयोग के वाइस चेयरमैन (पब्लिक पॉलिसी) राज शेखर जोशी ने चिकित्सा क्षेत्र में एआई के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई का समझदारी से उपयोग करने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने साहस को एक महत्वपूर्ण मानवीय शक्ति बताया।
देहरादून की नगर आयुक्त नमामी बंसल, आईएएस ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए सही निर्णय लेने, दृढ़ निश्चय बनाए रखने और एआई को एक मार्गदर्शक के रूप में अपनाने की बात कही, न कि अंतिम निर्णयकर्ता के रूप में।
करियर ग्रोथ एवं लीडरशिप कोच तेजा गुडलुरु ने पहचान और भय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि कभी-कभी स्वयं को खोया हुआ महसूस करना भी एक ताकत बन सकता है। उन्होंने कहा कि एआई उत्तर देता है, जबकि विवेक और निर्णय मनुष्य के पास होते हैं।
मास्टर्स यूनियन के हेड – इंस्टीट्यूशनल पार्टनरशिप्स अंकुर वोहरा ने कहा कि तकनीक का उपयोग सोचने की क्षमता को सहारा देने के लिए होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करने के लिए।
एआई टेक क्रिएटर एवं डिजिटल एजुकेटर राजस निकुंभ ने बताया कि वास्तविक शक्ति सीखने, स्वयं को अनुकूलित करने और ज्ञान को व्यवहार में उतारने में है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई न तो भयावह है और न ही केवल चैटजीपीटी तक सीमित है।
उद्यमी एवं लेखक प्रशांत जैन ने अनुकूलनशीलता को सफलता की कुंजी बताया, जबकि संस्थापक प्रज्ञा दीक्षित ने कहा कि आज के समय में ताकत का अर्थ यह भी है कि जानकारी की अधिकता के बीच कब रुकना है और कब ‘ना’ कहना है, यह समझना।
इस आयोजन का संचालन करियर काउंसलर शिविका बत्रा के मार्गदर्शन में तुलाज़ इंटरनेशनल स्कूल के छात्र स्वयंसेवकों एवं फैकल्टी सदस्यों द्वारा किया गया, जिनके सामूहिक प्रयासों से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।




