उत्तराखंड

सबके प्रति करूणा भाव

– संत राजिन्दर सिंह जी महाराज
हम चाहे बच्चे हों, किशोर हो या नौजवान, कई बार हमें धमकाने वाले या झगड़ालू किस्म के लोगों का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के लोग यह दर्शाने की कोशिश करते हैं कि वे हमसे बेहतर हैं। वे ऐसी बातें या ऐसे कार्य करते हैं जिनसे कि दूसरों को चोट पहुँचे।
इस स्थिति में एक बात जो हमें हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि हम ऐसे लोगों के साथ दयालुता भरा व्यवहार करने की कोशिश करें। अगर हम उनके साथ प्रेम और शांतिपूर्वक व्यवहार करेंगे, तब वे बदले में हमें चोट नहीं पहुँचाएंगे। उन्हें यह अहसास होगा कि दूसरों के साथ प्यार और करूणा भरा व्यवहार करना चाहिए।
प्रेम और करूणा ताकत के ऊपर हमेशा जीत हासिल करते हैं। कुछ लोग समझते हैं कि जोर-जबरदस्ती, कठोरता से या मीन-मेख निकालकर वे दूसरों से सर्वोत्तम कार्य करवा सकते हैं लेकिन सच्चाई इसके उलट है। उनका ऐसा व्यवहार लंबे समय तक नहीं चलता। धीरे-धीरे लोग उनसे दूर होते चले जाते हैं। जब लोगों से कठोर शब्दों में या ऊँची आवाज़ मंे बोला जाता है तो वे दुःखी होकर चुपचाप वहाँ से दूर चले जाते हैं। लेकिन जब हम सभी से प्रेम, उत्साह या करूणा भरे हृदय से व्यवहार करते हैं और उनसे प्यार से बातचीत करते हैं तो वे स्वयं हमारे लिए ज्यादा से ज्यादा कार्य करना चाहते हैं। यदि हम दूसरों से प्रेम और करूणा का व्यवहार करते हैं तो उन्हें आसानी से अपना मित्र बना सकते हैं।
जीवन में मिठास डालने से यह संसार अधिक प्रेममय हो जाता है। प्रेम की गर्माहट डालने से चीज़ें अधिक आसान हो जाती हैं। अगर हम दूसरों तक उत्साह, मीठे बोल और मुस्कुराहट से बात करेंगे तो हम देखेंगे कि हम जो कुछ भी करेंगे उससे सभी प्रभावित होंगे। जोर-ज़बरदस्ती अधिक देर तक सफल नहीं होती। एक करूणामय जीवन जीने के लिए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम किसी को भी दुःख न पहुँचायें। जब हम देखते हैं कि हमारे दोस्त किसी को सता रहे हैं तो हमें उसमें भाग नहीं लेना चाहिए। इस स्थिति में हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि हम उन्हें समझाने का प्रयास करें कि वह ऐसा न करें। अगर वे फिर भी नहीं मानते तब हमें उनका साथ नहीं देना चाहिए। अगर हम सबके लिए दया और करूणा से भरे इंसान हैं तो समय के साथ-साथ हमारा उदाहरण दूसरों को भी दयालु और देखभाल करने वाला इंसान बनाने के लिए प्रेरित करेगा। इस प्रकार हम संसार को एक बेहतर स्थान बनाने में सहायक हो सकते हैं।
आओ हम सभी से प्रेम और करूणा का व्यवहार करें। आईये, हम अपने जीवन में प्रेममयी और विनम्र हों ताकि हमारे चारों ओर प्रेम से भरपूर माहौल बन सके।

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